4091_space1अहमदाबाद| अप्रैल 2015 में आप भी अंतरिक्ष की सैर कर पाएंगे। ऐसा संभव हो पाएगा उस वर्चुअल टेक्नोलॉजी से जिसे भारतवंशी डॉ. सावन छनियारा बना रहे हैं। वे उस टीम का हिस्सा हैं जो इंग्लैड के सरे स्पेस सेंटर में यह काम कर रही है। अभी तक दुनियाभर में सिर्फ 430 लोग ही अंतरिक्ष की सैर कर पाए हैं।

डॉ. छनियारा ने बताया कि इस टेक्नोलॉजी से लोग अंतरिक्ष सैर का आनंद ले पाएंगे। 20 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से हमारी पृथ्वी कैसी नजर आती है। वह भी घर बैठे इंटरनेट के जरिए। इस टेक्नोलॉजी का नाम ‘स्टेट ऑफ द ऑर्ट वर्चुअल राइड स्पेस टैक्नोलॉजी।’ इस यात्रा के लिए ‘ऑक्यूलस रिफ्ट’ नाम का डिवाइस पहनना पड़ेगा। इस डिवाइस की कीमत करीब चार हजार रुपए है।

5400_space1पेलोड में क्या

24 हाई क्वालिटी कैमरों से लैस पेलोड को गरम गुब्बारों के जरिए 20 किमी की ऊंचाई पर भेजेंगे। ये कैमरे वहां की रिकॉर्डिंग करेंगे।

टीम में कौन

डॉ. सावन छनियारा, डॉ. एरोन नोल, डॉ. थॉमस फ्रेम और डॉ. थॉमस हार्ले। इस टीम को अपना प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अप्रैल 2015 तक का समय है।

ऐसे करेगा काम

– ‘ओक्यूलस रिफ्ट’ में विभिन्न दिशाओं को ध्यान में रख कर 24 कैमरे फिट हैं। ये अंतरिक्ष की तस्वीरें कैप्चर करेंगे।

– तस्वीरों को विशेष सॉफ्टवेयर से अंतरिक्ष की सैर में तब्दील किया जाएगा।

– ‘ओक्यूलस रिफ्ट’ डिवाइस से अंतरिक्ष की सैर का आनंद लिया जा सकेगा।