बलात्संग का आरोपी १० वर्ष के सश्रम कारावास से दण्डित
आदिवासी अंचल कुरई के ग्राम चिखपानी में नाबालिग बालिका को डरा धमका कर बलात्संग करने वाले गणेश मर्सकोले को धारा ३६३, ३६६, ३७६, ३७६(झ), ५०६ भादवि ३, ४ लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम २०१२ मामले में दोषी पाया गया है। आरोपी को माननीय विशेष जिला सत्र न्यायाधीश सिवनी एस के शर्मा द्वारा विभिन्न धाराओं के तहत निर्णय लेते २८ मार्च २०१७ को सश्रम कारावास एवं अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है।
प्रकरण बाबद विशेष लेाक अभियोजक रमेश उइके उप संचालक(अभियोजन) द्वारा बताया गया है कि घटना ग्राम चिखलापानी(कुरई) की है। आरोपी गणेश मर्सकोले द्वारा १ फरवरी २०१६ को ग्राम की नाबालिग बालिका को अपनी चिकनी चुपड़ी बातों से बहला फुसलाकर मोटरसाईकिल से नागपुर ले गया। वहां उसके द्वारा शादी की बात कह कर उसके साथ बलात्संग किया तथा बालिका को इस बाबद किसी को बताने कहा गया। साथ ही उसके संग शादी करने की बात कहते हुए शारीरिक संबंध बनाते रहा। बताया गया है कि बालिका द्वारा जब आरोपी गणेश से शादी करने की जिद करने पर उसने उसे जान से मारनी की धमकी देते हुए किसी को न बताने काहा गया।
प्रकरण बाबद पाया गया कि बालिका के घर से लापता होने पर परिजनों द्वारा उसे पहले मोहल्ले व ग्राम मे ढूंढा गया। साथ ही रिश्तेदारी में भी पतासाजी की गई। बालिका के न मिलने पर थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट की गई। इसी बीच बालिका द्वारा घर लौटकर अपने साथ घटित घटना की जानकारी दी गई। पीडि़त बालिका के बयान के आधार पर तत्पश्चात प्रकरण की विवेचना के उपरांत आरोपी गणेश मर्सकोले के विरूद्ध पुलिस द्वारा धारा ३६३, ३६६, ३७६, ३७६(झ), ५०६ भादवि ३, ४ लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम २०१२ के तहत न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
उक्त प्रकरण में विद्वान न्यायाधीश एस. के. शर्मा द्वारा दोनो पक्षो के साक्ष्य एवं बयानों को सुनकर तथा अभियोजन पक्ष के तर्को से सहमत होते हुए २८ मार्च २०१७ को अपना निर्णय पारित किया गया। निर्णय के तहत विषेश सत्र न्यायाधीश एस.के. शर्मा सिवनी द्वारा आरोपी को धारा ३६३ भादवि के अंतर्गत आरोपी को ०३ वर्ष का सश्रम कारावास एवं २०००/- रूपये के अर्थदंण्ड एवं व्यतिक्रम में ०४ माह का सश्रम कारावास से दंडित किया गया। धारा ३६६ भादवि के अंतर्गत ०५ वर्ष का कारावास एवं २०००/- रूपये के अर्थदण्ड एवं व्यतिक्रम में ०४ माह का अतिरिक्त सरम कारावास से दंडित किया गया एवं धारा ३७६(२)(१) भादवि में १० वर्ष का कारावास एवं २०००/- रूपये के अर्थदण्ड एवं व्यतिक्रम में ०४ माह का सश्रम कारावास से दंडित किया गया। धारा ३७६(२)(एन) भादवि में १० वर्ष का कारावास एवं २०००/- रूपये के अर्थदण्ड एवं ०१ व्यतिक्रम में ०४ माह का सश्रम कारावास से दंडित किया गया एवं धारा ५०६ भादवि में ०१ वर्ष का कारावास एवं ५००/- रूपये के अर्थदंड एव व्यतिक्रम में ०१ माह का कारावास से दंडित किया गया है।
धारा ३५७(३) द.प्र.स. के तहत ७०००/- रूपये की क्षतिपूर्ती की राशि पीडि़ता को प्रदाय करने हेतु निदेर्शित किया गया है।