4896_hathiyarपेरिस: स्वीडिश थिंक टैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत हथियार खरीद के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा मुल्क बन गया है। इतना ही नहीं, इस अंधाधुंध खरीद में उसने प्रतिद्वंदी चीन और पाकिस्तान को भी पीछे छोड़ दिया है। वह दोनों पड़ोसी मुल्कों की तुलना में तीन गुना ज्यादा हथियार आयात कर रहा है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, अगर 2009 से 2013 के पांच साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत ने हथियार खरीद में 14 फीसदी का इजाफा किया है। बीते पांच सालों में उसके बड़े हथियार आयात करने की दर 111 फीसदी रही। यह पूरी दुनिया का 7 से 14 फीसदी हिस्सा है।

2010 में भारत ने तेजी से हथियार आयात करते हुए चीन को भी पछाड़ दिया था। भारत का घरेलू रक्षा उद्योग इन दिनों कम उत्पादन की मार झेल रहा है। वहीं, चीन से बेहतर हथियारों और सुरक्षा संबंधी कारणों से भारत को नए हथियार खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

रूस ने बेचे भारत को सबसे ज्यादा हथियार

2009-13 के बीच में भारत को उसके पुराने सहयोगी रूस ने 75 फीसदी हथियार दिए। इसके अलावा भारतीय हथियारों के अपग्रेड और अत्याधुनिक बनाने में भी मदद की। बीते सालों में अमेरिका ने भी भारत को हथियार बेचे हैं।

आईएचएस जेन द्वारा जारी आंकड़ों की माने तो बीते साल भारत अमेरिका का सबसे बड़ा हथियार खरीददार बन गया। उसने अमेरिकी हथियारों की खरीद में 1.9 बिलियन डॉलर का निवेश किया। इसमें सबसे ज्यादा पैसा बोइंग सी-17ए ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और पी-81 मेरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट के लिए बहाया गया। हालांकि 2009-13 तक अमेरिका ने सिर्फ सात फीसदी ही हथियारों की बिक्री भारत को की है। भारत का पुराना प्रतिद्वंद्वी और पड़ोसी देश पाकिस्तान 119 फीसदी की दर से हथियारों का अधिग्रहण कर रहा है।

कौन है बड़े निर्यातक और आयातक

अमेरिका (29 फीसदी), रूस (27), जर्मनी (7), चीन (6), फ्रांस (पांच फीसदी) हथियार निर्यातकों में दुनिया के पांच शीर्ष देश हैं। यह सभी दुनिया में 74 फीसदी हथियारों का निर्यात करते हैं। वहीं, सबसे बड़े आयातकों में भारत, चीन, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हैं।

स्टॉकहोम रिपोर्ट के सीनियर रिसर्चर सीमेन वेजमैन ने बताया कि चीन, रूस, और अमेरिका अपने हथियारों की सप्लाई करने के लिए दक्षिण एशियाई देशों को प्राथमिकता देते हैं। ऐसा सिर्फ राजनीतिक और आर्थिक कारणों की वजह से है। मुख्यत: चीन और अमेरिका एशिया में अपना प्रभुत्व जमाने के लिए एशियाई देशों को हथियार बेचने की होड़ में लगे रहते हैं।

अफ्रीकी देश भी तेजी से हो रही खरीदी

अफ्रीका में 2004-08 से 2009-13 के बीच में हथियार खरीद में 53 फीसदी का उछाल आया है। अल्जीरिया, मोरक्को और सूडान शीर्ष अफ्रीकी देश हैं। वहीं, बीते सालों में यूरोपियन देशों में हथियार आयात में 25 फीसदी की गिरावट आई है। यूरोप के लिए ब्रिटेन सबसे बड़ा निर्यातक देश है। इसमें अजरबेजान, ग्रीस उसके मुख्य हथियार खरीददार देश हैं।